
कमरे में सांसों की तपिश और दोनों के बीच का खिंचाव अब उस मोड़ पर पहुँच चुका था जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
अहान्या की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, उसने खुद को समेटने की कोशिश में अपनी टाँगें हल्की सी ऊपर उठानी चाहीं, लेकिन कायश ने उसे ज़रा भी छूट नहीं दी। उसने अपने भारी बदन के दबाव से उसे वापस पूरी तरह गद्दे पर दबा लिया। उसकी पकड़ में बेपनाह हक़ और जुनून का ऐसा असर था कि अहान्या का हिलना भी मुमकिन नहीं था।








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