
वान्या के कदम खुद-ब-खुद मिस्टर श्रीवास्तव की तरफ बढ़ गए। उसका दिल अभी भी वितांश की उन खौफनाक बातों से दहल रहा था। उसने पास जाकर एकदम बेचैन आवाज़ में पूछा, "अंकल, वो... वो ऐसे क्यों बोल के गए? इतना गुस्सा, इतनी नफ़रत... क्यों?"
श्रीवास्तव जी ने एक गहरी, बेबस सांस ली और मिस्टर जिंदल की तरफ देखकर धीमी आवाज़ में बोले, "शायद अपने बाप से नफ़रत करता है, इसलिए... अतीत के कुछ ऐसे ज़ख्म हैं जो कभी भरे नहीं।"








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