
ये सुनते ही वितांश का धीरज पूरी तरह जवाब दे गया। उसने पास पड़े ब्लैंकेट को खींचा और दोनों के ऊपर डाल दिया। उस ब्लैंकेट के छोटे से अंधेरे में कमरे का माहौल बेहद गर्म, भारी और नशीला हो चुका था। दोनों की सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं।
वितांश की तड़प ऐसी थी कि वो अब खुद पर से सारा कंट्रोल खो चुका था। उसने वान्या का हाथ पकड़ा और उसे अपने प्राइवेट पार्ट पर रखते हुए गिड़गिड़ाने लगा, "प्लीज चोकोबार... मुझे शांत कर दो... मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं होता... देखो मेरी हालत... प्लीज..."








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