
शेरा की हर एक बात वाइन सेलर के ठंडे सन्नाटे में गूँज रही थी, लेकिन नशे और जूनून की चरम सीमा पर पहुँच चुका सनक अब किसी की नसीहत सुनने की हालत में नहीं था। उसने अपनी भारी, पसीने से भीगी पलकों को उठाया और एक कड़क, टूटी हुई आवाज़ में शेरा का हाथ अपने कंधे से झटका।
"तुम... तुम कुछ मत कहो, शेरा..." सनक ने लड़खड़ाती आवाज़ में फर्श के बल उठने की कोशिश करते हुए कहा। उसकी सांसें शराब की बदबू और बेइंतहा दर्द से भारी थीं। "मुझे कोई सलाह नहीं चाहिए। अगर आज मुझे कोई शांत कर सकता है, तो वो सिर्फ और सिर्फ वही है... मेरी 'जान'..."








Write a comment ...