
बंकर के उस बंद कमरे का भारी स्टील का दरवाज़ा जब एक ज़ोरदार लात से टूटकर सीधे फर्श पर गिरा, तो धूल और मलबे के गुबार के बीच सनक राजपूत खड़ा था। उसकी आँखें पूरी तरह से खून की तरह लाल हो चुकी थीं और उसका पूरा शरीर गुस्से से काँप रहा था।
जैसे ही सनक की नज़र बिस्तर की तरफ गई, उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। अवि बेड पर बेल्ट से बंधी हुई थी, उसकी ड्रेस फटी हुई थी और आरिक्य लगभग न्यूड होकर उसके ऊपर था, उसके नीचे के कपड़ों को उतारने की कोशिश कर रहा था।








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