
वितांश का पागलपन अब अपनी आखिरी हदों को भी लांघ चुका था। वान्या की जांघों के बीच उसकी उंगलियों की रफ हलचल और तेज हो गई, जिससे वान्या का पूरा जिस्म थर-थर कांप रहा था। वो हांफते हुए और भी ज्यादा डर्टी और नग्न बातें करने लगा, जिन्हें सुनकर किसी भी शरीफ लड़की के कान लाल हो जाएं।
वान्या ने शर्म और बेबसी के मारे रोते हुए अपने कांपते हाथ को आगे बढ़ाया और वितांश के होंठों पर रख दिया, "जिंदल साहब... प्लीज, अब और नहीं..." उसने रोती हुई आँखों से ना में अपना सिर हिलाया, मानो वो भीख मांग रही हो कि वो इन गंदी बातों को बंद कर दे।








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