
वितांश, जो अब तक एक पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ा था, उस उंगली के इशारे को देखकर अंदर तक हिल गया। उसकी जो आंखें हमेशा गुरूर और जीत की चमक से भरी रहती थीं, वो इस वक्त हल्की सी नम हो गईं।
उसकी पलकों के कोने गीले हो गए, लेकिन उसने अपने आंसुओं को गिरने नहीं दिया। उसने एक गहरी सांस ली, अपनी नजरें उस शख्स से हटाईं और अंदर अपने रूम की तरफ कदम बढ़ाते हुए वहां खड़े कायश से बेहद रफ और फॉर्मल टोन में कहा, "कायश... मिस्टर जिंदल के रहने के अरेंजमेंट्स गेस्ट हाउस में अच्छे से करो। मेक श्योर उन्हें कोई कमी न हो।"








Write a comment ...