
होटल के उस वीआईपी सुइट का भारी दरवाज़ा जब धड़ाम से बंद हुआ, तो अवि का दिल दहल गया। सनक ने उसे कंधे से नीचे उतारा और खुद पलटकर दरवाज़े की हैवी लॉक सेट करने लगा। उसकी आँखों में इस वक़्त जो सुरूर, नशा और बेइंतहा गुस्सा था, वो अवि ने पहले कभी नहीं देखा था।
"शेरा!" सनक ने बाहर गलियारे की तरफ़ देखते हुए बेहद कड़क आवाज़ में हिदायत दी, "बाहर पहरा दो। जब तक मैं अंदर हूँ, परिंदा भी पर न मार पाए।"








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