
रिशिमा के पास अब युवराज के इस भयानक और जुनूनी रूप के आगे घुटने टेकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। वो अपनी आँखें बंद किए, आँसुओं से भीगे चेहरे के साथ बस धीरे से 'हाँ' में अपना सिर हिला देती है। उसकी इस सहमति को पाते ही युवराज के अंदर का पागलपन एक शांत मगर बेहद गहरे जुनून में बदल गया।
वो बिना कोई वक्त गंवाए बिस्तर पर थोड़ा नीचे की तरफ सरका। रिशिमा की फैली हुई जाँघों के बीच आते ही उसकी गर्म सांसें सीधे रिशिमा की किटी को छूने लगीं। युवराज धीरे-धीरे आगे बढ़ा और सबसे पहले अपनी जीभ के बेहद हल्के और मुलायम स्पर्श से रिशिमा के उस नाजुक हिस्से को सहलाया। उस पहली भीगी छुअन से रिशिमा का पूरा बदन बिस्तर पर झटके से सिहर उठा।








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