
वितांश का पागलपन अब एक बेहद उग्र मोड़ ले चुका था। वान्या की बढ़ती हुई बेचैनी और उसकी घबराहट को देखकर वो रुकने के बजाय और ज़्यादा वाइल्ड होने लगा। उसने एक ही झटके में वान्या की साड़ी और पेटीकोट को उसके जिस्म से पूरी तरह खींचकर अलग कर दिया। अब वान्या के जिस्म पर कपड़ों का कोई नामोनिशान नहीं बचा था। वह अपनी लेदर की बड़ी सी चेयर पर पूरी तरह बेपर्दा, वितांश के सामने थी।
वान्या इस चरम शर्म और बेबसी से बुरी तरह परेशान हो उठी। वह खुद को समेटने की, अपने जिस्म को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। लेकिन वितांश ने उसे कोई मौका नहीं दिया। उसने वान्या के दोनों नाजुक पैरों को अपनी मजबूत मुट्ठियों में जकड़ा और उन्हें ज़बरदस्ती उठाकर अपने चौड़े कंधों पर रख लिया। इस पोजीशन ने वान्या की उस बेहद संवेदनशील जगह को पूरी तरह से वितांश के चेहरे के सामने लाकर रख दिया।








Write a comment ...