
वान्या जैसे ही वितांश की चेयर के करीब पहुँची, वितांश की बर्दाश्त का बांध पूरी तरह टूट गया। वह अपनी जान से एक पल की भी दूरी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। इससे पहले कि वान्या कुछ समझ पाती, वितांश ने अपनी मजबूत मुट्ठी में उसकी कलाई थामी और एक झटके में उसे खींचकर अपनी गोद में बैठा लिया।
वान्या के मुँह से एक दबी हुई आह निकल गई। वह बुरी तरह घबराकर उसके चौड़े कंधों पर अपने हाथ रख दी। वितांश ने तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर पर कस दिया ताकि वह ऊपर उठ न सके। लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में वो फोन वाला हिंसक पागलपन बिल्कुल नहीं था। वह बेहद शांत, मखमली और प्यार भरे लहज़े में बात करने लगा, जैसे अपनी रूठी हुई जान को सहला रहा हो।








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