
वान्या बस सामने देखे जा रही थी। उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था कि उसके सामने क्या चल रहा है, क्योंकि इस वक्त भी वितांश ने अहान्या के दोनों हाथों को कसकर पकड़कर उसकी पीठ से लगा रखा था। दोनों एक-दूसरे के काफी करीब थे। वान्या की तो जान जल रही थी। वितांश अगर किसी और की तरफ देख भी ले, तो उसे बर्दाश्त नहीं होता था—भले ही इस वक्त सामने उसकी अपनी बहन थी, लेकिन उसे ये सब देखना अच्छा नहीं लग रहा था। उसकी पीठ के पीछे क्या चल रहा था?
वितांश ने जैसे ही वान्या की आँखों में आँसू देखे, उसने झट से अहान्या को छोड़कर पीछे करते हुए बोला, "बाद में बात करेंगे इस बारे में। हम किसी के सामने बात नहीं कर सकते।"








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