
वितांश की बात सुनकर बेचारी वान्या उसकी आँखों में देखे जा रही थी। एक तो जो पर्चा मिला था उसे, वो पेपर पढ़ने के बाद उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, पूरा चेहरा सफेद पड़ गया था। उसकी आँखों में जो डर था, जो खौफनाक दर्द था, उसे देख पाना इतना आसान भी नहीं था क्योंकि उसने उसे छुपाने की भरपूर कोशिश की थी।
फिर भी उसने बस कन्फर्म करने के लिए वितांश की आँखों में देखकर डरते हुए कहा, "पर मेरी बहन..."








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