
वान्या अब उन बीते हुए पलों से बाहर आ चुकी थी, लेकिन उसे अच्छा नहीं लग रहा था। कहां वितांश उसके हर एक चीज के बोलने के पहले सब कुछ हाजिर करता था, ये सारी चीज क्या थी। वो भी थोड़ा तुरंत बिस्तर पर रोते हुए बोली, "पर आपसे नफरत करने लगी हूं।"
इतना सब कुछ प्यार दिखाकर आपने अपनी औकात दिखा दी थी। वाह वैसे ही बिस्तर पर लेटकर कुछ सोचने लगी। बस उसके दिमाग में भी यही चल रहा था कि आखिर घर वाले इतना डरते क्यों थे और सुप्रीम क्यों कहा जाता था वितांश को।







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