
सतीश जी ने बस छोटी सी हिदायत दी और वहां से जाने लगे। फिर वो अपनी बाइक पर बैठते हुए धीरे से ऊपर खिड़की की तरफ देखने लगे, जहां से अहान्या और तन्या दोनों ही उन्हें देख रही थीं।
लेकिन उन्होंने चेहरा झुकाते हुए कहा, "जानता हूं, तुम दोनों के साथ गलत कर रहा हूं। तुम्हारी खुद की बहन की शादी में तुम्हें लेकर नहीं जा रहा हूं, लेकिन इसमें भी मेरी मजबूरी है बेटा। एक बार ये शादी हो जाए, उसके बाद सारी प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी। तुम दोनों को यहां से लेकर जाऊंगा मैं।"







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