
वो नहीं जानती थी कि जानबूझकर वितांश उसे परेशान कर रहा था, और फिर से वही वाली हालत हो गई थी जो कुछ वक्त पहले हुई थी उनकी, जब कायश बाहर खड़ा था। लेकिन इस बार सतीश जी बाहर खड़े थे। अगर कुछ भी हो जाता तो सतीश जी को हार्ट अटैक आ सकता था। वो बहुत अच्छे से जानते थे, तो वो तुरंत वितांश के कंधे पर हाथ रखकर धीरे से बोली, "आपके हाथ जोड़ती हूं, प्लीज ऐसा कुछ भी मत कीजिए!"
उसने रोते हुए कहा तो तुरंत वितांश उसे लेकर बिस्तर की तरफ आते हुए बोला, "तो क्यों तुम नहीं समझती हो चौक को बाहर की तुम्हारे जो कपड़े हैं, वो सिर्फ मेरे सामने उतर सकते हैं। तुम शादी करना चाहती हो ना कायश से?"







Write a comment ...